एक बार एक राजा के दरबार में सोने के पिंजरे में एक तोता कैद था। तोते की गंदी आदत यह थी कि जब भी पंडित जी आते थे तो तोता उन पर कटाक्ष करता था। पंडित जी महीने में दो बार महल में आते थे, आकर कथा सुनाते थे और कथा के प्रत्येक अध्याय के अंत में कहते थे कि हरि मिले तो बंधन छूटे। जहां पंडितजी यह पंक्ति बोलते कि तोता बोलने लगता कि पंडित जी झूठे हैं।
पंडित जी के लिए अजीबोगरीब परिस्थिति हो गई थी। उन्हें समझ में नहीं आता कि यह तोता क्या कर रहा है?तीन चार बार ऐसा ही हुआ। अंत में पंडित ही अपने गुरु के पास गए और बोले कि महाराज एक बात बताइए कि यह तोता मुझे बार-बार झूठा क्यों बोलता है। मैं तो अच्छी बात बोलता हूं कि हरि मिले तो बंधन छूटे गुरु जी बोले कि यह काम करते है, चलकर तोता से ही पूछते हैं।
वह दोनों तोता के पास पहुंचे और पूछने लगे कि आप इस पंडित को बार-बार झूठ क्यों बोलते हो? तब तोता ने एक छोटी सी कहानी सुनाई।महाराज एक बार में उड़ता उड़ता ऋषि के आश्रम पहुंचा।वहां पर ऋषि अपने शिष्यों को मंत्र उच्चारण सिखा रहे थे, उन्हीं मंत्रों में से मैंने भी एक मंत्र सीख लिया। उस मंत्र को सीखकर मैंने उस मंत्र का उच्चारण कर दिया। ऋषि के शिष्यों ने मुझे चमत्कारी तोता समझकर कैद कर लिया।कुछ दिन के बाद ऋषि का एक से जो बहुत अमीर था आया और मुझसे बोलता हुआ देखकर आश्चर्य किया और मुझे साथ ले गया। उसने मुझे चांदी के पिंजरे में कैद कर लिया।
एक दिन राजा जी ने अपने दरबार में दावत रखी और सेठ को लगा कि राजाजी के लिए तोता से बड़ा और क्या हो सकता है। उसने मुझे राजा को उपहार स्वरूप भेंट किया। रानी को मैं बहुत अच्छा लगा और उन्होंने मुझे चांदी के पिंजड़ा से निकाला परंतु रहा मै पिंजरे के अंदर ही। अब मुझे सोने के पिंजरे में डाल दिया गया मैंने एक बार हरि का नाम क्या बोला, मेरा तो बंधन ही नहीं छूट रहा है गुरुजी ने तोते को अपने पास बुलाया और कान में कुछ कहा और वहां से चले गए।
अगली सुबह सैनिकों ने देखा कि तोता पिंजरे में उल्टा पड़ा हुआ था। एक सैनिक को लगा कि शायद तोता मर गया है ।दूसरा सैनिक महाराज के पास दौड़कर गया और बोला कि महाराज जो आपका प्यारा तोता था वह अब इस दुनिया में नहीं रहा। एक सैनिक जो पिंजड़े के पास था तोते को मरा हुआ समझकर उसने पिंजड़े का दरवाजा खोला और दरवाजा खुलते ही तोता उड़ गया। उड़ते उड़ते तोता बोला गुरु मिले तो बंधन छूटे। एक छोटी सी कहानी हमें सीख देती है कि हमारे जीवन में एक ऐसा व्यक्ति का होना बहुत जरूरी है जो हमारा सही मार्गदर्शन कर सके सही सलाह पर चलेंगे तो सही रास्ते पर जाएंगे गलत आदमी के सलाह मानेंगे तो गलत रास्ते पर जाएंगे।
अमृत पत्रिका